भारत के अंदर खेती बाड़ी की नई नई तकनीक और उनकी संभावनाएं क्या है
बहुत सारे लोग ऐसा मानते हैं कि खेती करना एक फायदेमंद धंधा नहीं रहा है क्योंकि खेती के अंदर मेहनत को बहुत ज्यादा लगते हैं लेकिन आमदनी बहुत ही कम होती है लेकिन ऐसे भी बहुत सारे लोग हैं जिन्होंने खेती के काम को बहुत ही फायदे का धंधा बना लिया है ऐसे हमारे देश में बहुत सारे किसान हैं जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन से इस खेती को नए रूप से करने में बहुत ही ज्यादा मेहनत और ईमानदारी के साथ अपनी अच्छी मार्केटिंग की है और इसके दम पर वह बहुत ही अच्छा मुनाफा और आमदनी भी ले पा रहे हैं इसीलिए खेती में हमें परंपरा एक छोड़कर मैं रूप से इसकी और आना पड़ेगा हमें खेती से जुड़ी हुई विभिन्न नई नई टेक्नोलॉजी सीखनी पड़ेगी जिसके द्वारा हम खेती को ज्यादा लाहे बंद बना सकेंगे लेकिन जैसे-जैसे खेती में उन्नत तकनीक के आती जाएंगी वैसे वसे ही खेती एक अच्छा व्यवसाय बनता चला जाएगा इस प्रकार आप भली-भांति जानते हैं कि हमारे देश में समय-समय पर किसानों को बहुत सारी सब्सिडी भी दी जाती है उसके बावजूद भी किसानों की हालत सुधरे नहीं रहे इसका सबसे बड़ा कारण है कि एक किसान बहुत सारी चीजें पैदा तो कर लेता है लेकिन जो है जब वह उस चीजों को बेचने के लिए जाता है तब वह मंडी में उसका असल भाव उसको नहीं मिलता इसलिए बड़े किसानों को छोटे किसानों के साथ मिलकर प्रोडक्शन की ओर आगे बढ़ना होगा क्योंकि वह अगर अपनी फसलों के उत्पाद बनाकर भेजते हैं इससे उनकी आए वहीं पर 3 से 4 गुना बढ़ जाएगी इसलिए मेहनत भी उतनी ही लग रही है लेकिन उसकी आय में बढ़ोतरी होती जा रही है इस प्रकार देश की हालत जो है वह किसानी के दम पर सुधर सकती है दूसरी तरफ को हार्मफुल कीटनाशक जो के सेहत के लिए बहुत ही ज्यादा विनाशक हैं उनका कम से कम उपयोग होना चाहिए क्योंकि अगर इसका कम से कम उपयोग होगा तो हम गाय के बने गोबर से बना हुआ पेस्टिसाइड बनाकर भी अच्छा उत्पादन ले सकते हैं और अच्छी अच्छी नई नई टेक्निक सीट पर आगे बढ़ सकते हैं अगर हम इजराइल का एग्जांपल ले तब हम देखते हैं कि इजरायल खेती के मामले में आत्मनिर्भर बन चुका है और वह भी उस जगह पर जहां पर रेतीला भी नादान है और वहां पर कुछ भी पैदा होता ही नहीं वहां पर भी उन्होंने हर तरह की फसलें पैदा करके दिखा दो और आज वह अपना पैदा किया उत्पाद आगे चलकर एक्सपोर्ट भी कर रहे हैं इससे एक बात पता चलती है कि अगर किसानों के साथ सरकार मिलकर कोई काम करे तब भी है बड़े रूप से हो पाता है क्योंकि एक आम किसान के पास इतने सारे संसाधन नहीं होते इतने संसाधन के प्रकार के पास होते हैं इसलिए सरकारों को किसानों के साथ मिलकर बहुत बड़े प्रोजेक्ट लगाने की जरूरत है जिससे वह किसानों को एक अच्छी आएगा सोर्स दे सकते हैं इसलिए हम यह कह सकते हैं कि उन्मुक्त कली के और गाय के गोबर से युक्त पेस्टिसाइड दोनों मिलकर ही वह बहुत ही अच्छी खेती करने में लाभकारी हो सकते हैं और वैसे भी पूरी दुनिया में ऑर्गेनिक प्रोडक्ट की डिमांड दिनभर बढ़ती ही जा रही है और इस डिमांड को पूरा करने के लिए हमें और ऑर्गेनिक खेती की ओर आना ही होगा क्योंकि ऑर्गेनिक खेती की जमीन को बचाने के लिए एकमात्र हाल है जिस प्रकार से हमें जमीन के अंदर जहर जाने के कीटनाशकों डालते जा रहे हैं और उससे पैदा हुई फल सब्जियां खाते जा रहे हैं जिससे हमारे खाने में बहुत ही ज्यादा प्रदूषण आपका है और इसको खाकर हम अनेक प्रकार की बीमारियों का कारण बन रहे हैं और वही पैसा हमारा डॉक्टर के पास जा रहा है और हॉस्पिटल और डॉक्टर का खर्चा भी बढ़ता जा रहा है इस प्रकार यह एक दूसरे से जुड़ा हुआ है जिस प्रकार संसार की जनसंख्या बढ़ती जा रही है अगले कुछ सालों में पारंपरिक रूप से खेती से पैदावार लेना और उससे पूरा संसार का पालन पोषण करना बहुत ही ज्यादा कठिन दिखाई पड़ता है इसीलिए खेती के अंदर नई नई टेक्निक का आना बहुत जरूरी है जिसके अंदर बिना मिट्टी की खेती भी एक विकल्प हो सकता है और ऐसे भी विकल्प आते जा रहे हैं जिस पर आपको बिल्डिंग के अंदर ही खेती देखने को मिलती है और उसमें पानी की लगभग पचासी परसेंट तक बचत होती है और इसमें बहुत ज्यादा कीटनाशक और पेस्टिसाइड भी नहीं डालना पड़ता क्योंकि ऐसी पर्सनल पर मौसम का प्रभाव बहुत कम पड़ता है क्योंकि बाहर का मौसम अंदर एक बिल्डिंग पर ज्यादा असर नहीं डालता और इसके अंदर क्लाइमेट कंट्रोल की सुविधा भी बिल्डिंग के अंदर बनाई जा सकती है जिसके अनुसार हमारी फसल बर्बाद होने से बस जाती है आमतौर पर अगर हम अपनी 90 परसेंट फसल को बर्बाद होने से बचा लेंगे तब भी यह पूरे संसार के लिए भरण-पोषण के लिए काफी हो जाएगी इस प्रकार से हम कह सकते हैं कि भारत के किसान का पढ़ा लिखा होना बहुत जरूरी है क्योंकि जब तक एक किसान पढ़ा लिखा नहीं होगा उसको खेती की उन्नत तकनीकों के बारे में जानकारी नहीं होगी अनपढ़ किसान नई से नई खोज और नई से नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना नहीं सीख पाएगा आज हर तरह की टेक्नोलॉजी कंप्यूटर स्वचालित है इसलिए हमें एग्रीकल्चर सब्जेक्ट भी शुरू से ही बच्चों को स्कूल में सिखाना चाहिए जिस प्रकार से वह एग्रीकल्चर में किस प्रकार से नई-नई टेक्निक्स और किस प्रकार से नई-नई फसलों की पैदावार और अलग-अलग प्रकार की खेती के बारे में जानकारी का एक पाठ्यक्रम भी बच्चों के स्कूल के अंदर होना चाहिए इस प्रकार हम कह सकते हैं कि अगर इन सभी विषयों पर विचार किया जाए तो भारत का किसान वह दिन दूर नहीं जब उसकी हालत तो संसार के सारे किसानों से बेहतर हो जाएगी और विश्व के अंदर भारत का एक्सपोर्ट सबसे ज्यादा होग
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